हस्तरेखा का ज्ञान
ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत हस्त-रेखा का विशेष महत्व है, तथा हस्त रेखा को भारतीय ज्योतिष का अभिन्न अंग माना गया है | प्राचीन काल से ही ज्योतिष शास्त्र का अपना ही महत्व रहा है | जिस व्यक्ति को रेखाओ का ज्ञान होता है वह व्यक्ति हस्त रेखा की सहायता से किसी भी व्यक्ति के भूत, भविष्य तथा वर्तमान में घटने वाली घटनाओ का अनुमान लगा सकता है | आपके हाथ पर खींची हुई हर रेखा आपके भविष्य, वर्तमान तथा भूत से सम्बंधित रहस्यों को अपने में समाहित किये हुए है | आपके जीवन से सम्बंधित प्रत्येक हो चुकी तथा होने वाली घटना की जानकारी आपकी हस्त रेखाओ में विद्यमान है |

आप अपनी आयु, विवाह, संतान, भाग्य आदि के विषय में जानकारी ले सकते है, यदि आपको भी हस्त रेखा देखने में रूचि है तो WhatsApp पर भेज कर विश्लेषण करवा सकते है और अपने वर्तमान भूत भविष्य के बारे में जान सकते है
महत्वपूर्ण बड़ी हस्त रेखा देखने का तरीका (Way to See Important Big Hand Line)
आपकी हथेली में मुख्य रूप से सात बड़ी तथा सात छोटी रेखाएं होती है जिसमे मुख्य ह्रदय रेखा, भाग्य रेखा तथा मष्तिष्क रेखा होती है साथ बड़ी रेखाओ के नाम जीवन रेखा, ह्रदय रेखा, मस्तिष्क रेखा, भाग्य रेखा, सूर्य रेखा, स्वास्थ्य रेखा तथा शुक्र मुद्रिका है | इसके अतिरिक्त सात छोटी रेखाएं है, मंगल रेखा, चन्द्र रेखा, विवाह रेखा, निकृष्ट रेखा है तथा तीन मणिबंध रेखाएं होती है जो हथेली की जड़ और हाथ की कलाई स्थित होती है | इन रेखाओ के आधार पर व्यक्ति के वैवाहिक जीवन, उसके मष्तिष्क की दशा, संतान तथा आयु के विषय में आकलन लगा सकते है |
यह रेखा सबसे छोटी उंगली जिसे कनिष्का के नीचे से निकलकर तर्जनी उंगली के मध्य तक जाती है, यह रेखा व्यक्ति में अवसाद, गुण,स्वभाव, भावनात्मक स्थिरता, सामाजिक व्यवहार, चिडचिडा स्वभाव, साहित्य के प्रति प्रेम आदि को दर्शाती है, यह रेखा जितनी लम्बी होती है, वह व्यक्ति सरल , लोकप्रिय तथा मृदुभाषी होता है, तथा जीवन में सम्मान तथा प्रतिष्ठा प्राप्त करता है, जिन लोगो की ह्रदय रेखा छोटी होती है, वह व्यक्ति चिडचिडा, शंकालु, असंतोषी प्रवृत्ति के होते है | ऐसे व्यक्ति की छोटी सोच होती है, यह किसी पर जल्दी विश्वास नहीं करते है तथा इस प्रकार के लोगो की प्रवृत्ति क्रूर होती है |
यह हाथ की दूसरी महत्वपूर्ण रेखा होती है, इस रेखा की शुरुआत तर्जनी उंगली के नीचे से होती हुई बाहर के किनारे की ओर बढ़ती जाती है | मस्तिष्क रेखा प्रारम्भ में जीवन रेखा से जुड़ी हुई होती है। यह रेखा प्रायः कभी सीधी तो कभी नीचे की तरफ होती है। जिस व्यक्ति की मस्तिष्क रेखा जितनी अधिक लम्बी होती है उस व्यक्ति का मानसिक संतुलन उतना ही अच्छा होता है, इस प्रकार के लोग भाग्य की अपेक्षा मेहनत पर अधिक विश्वास करते है इनकी स्मरण शक्ति अच्छी होना, प्रत्येक कार्य को सोच समझ कर करना, हमेशा कुछ न कुछ सीखने में रूचि आदि गुण होते है
हथेली के नीचे के स्थान को मणिबंध कहते हैं, भाग्य रेखा मध्यमा और अनामिका के बीच से होकर नीचे हथेली की ओर जाती है| यह रेखा प्रत्येक व्यक्ति के हाथ में नहीं ह ोती है| भाग्य रेखा जितनी अधिक स्पष्ट तथा साफ होती है, व्यक्ति का जीवन उतना ही सुगम होता है तथा वह व्यक्ति भाग्यशाली होता है |
विवाह रेखा छोटी उंगली यानि कनिष्टा के नीचे वाले हिस्से में छोटी छोटी रेखाएं होती है, तथा ह्रदय रेखा के समानान्तर होती है| इसे प्रेम रेखा भी कहते है, हाथ में विवाह रेखा की संख्या के आधार पर उस व्यक्ति के उतने ही प्रेम सम्बन्ध होते हैं | विवाह रेखा टूटी या कटी होने पर विवाह में मतभेद होने की संभावना होती है | हथेली में विवाह रेखा सूर्य पर्वत की ओर जा रही हो या पहुंच गयी हो तो उसका विवाह समृद्ध और सम्पन्न परिवार में होता है| यदि दोनों हाथों में विवाह रेखा एक समान होने पर दोनों का वैवाहिक जीवन खुशहाल होता है तथा सामंजस्य बना रहता है | साथ ही यह रेखाए जितनी स्पष्ट होती है, व्यक्ति रिश्तों को उतना ही अधिक महत्व देता है|
संतान की रेखा विवाह रेखा के अंत में ऊपर की ओर जाती हुई प्रतीत होती है| विवाह रेखा पर खड़ी तथा सीधी रेखा पुत्र एवं टेढ़ी-मेढ़ी रेखा पुत्री का संकेत देती है। संतान रेखा जितनी अधिक स्पष्ट तथा उभरी हुई होती है तो उस संतान के द्वारा अधिक प्रेम तथा सुख की प्राप्ति होती है| इसी कारणवश किसी एक संतान से अधिक लगाव होता है, तथा उस संतान से बाकी की संतानों की अपेक्षा अधिक सुख की प्राप्ति होती है |